फिल्म पदमावती देखने से पहले अलाउद्दीन के बारे में जान लीजिये ये 5 दिलचप्स बातें

दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह अपनी सुपरहिट फिल्म बाजिराओ मस्तानी के बाद फिर से अपना जादू चलाने आ रहे है. संजय लीला भंसाली की फिल्म पदमावती जल्द ही थियेटरों में नज़र आने वाली है. संजय लीला भंसाली द्वारा निर्देशित यह फिल्म फिल्म चित्तौड़ के रानी पद्मिनी के चारों ओर घूमती है.
इसे एक महिला केंद्रित फिल्म भी कहा जा सकता है, इस साल 1 दिसंबर को फिल्म रिलीज होने की उम्मीद है, लेकिन इससे पहले कि आप अपने टिकट बुक करें, अलाउद्दीन खिलजी के बारे में कुछ ऐसे फैक्ट्स जान लीजिये जो की आपको आज तक नहीं पता थे.

इस तरह बने सुल्तान

अलाउद्दीन ने अपने चाचा और ससुर जलाल-उद-दीन खिलजी जो की खिलजी वंश के संस्थापक थे उनकी हत्या कर दी अुर इसके बाद वह सुल्तान के रूप में दिल्ली के सिंहासन पर बैठा। उन्होंने 1296 से 1316 तक शासन किया. इस महत्वाकांक्षी शासक को ‘द सेकेंड अलेक्जेंडर’ के रूप में जाना जाता था और ‘सिकंदर-ए-सानी’ का खिताब मिला।

वह एक काफी बढ़िया और गर्मजोशी शासक थे

अपनी खामियों के बावजूद, अलाउद्दीन एक बहुत ही बढ़िया शासक था और मेवाड़, गुजरात, रणथम्बोर, जालोर, मबर, मदुरै, वारंगल और मालवा को जीतकर अपने राज्य का विस्तार किया। उन्होंने कई बार मोंगल को भी हराया.

रानी पद्मिनी की तरफ झुकाव बना लड़ाई का कारण

अलाउद्दीनतो उन्होंने रानी पद्मिनी और उनके राज्य को जीतने का निनाये कर लिया जिसके बाद उन्होंने चित्तोर के राजा राणा रावल रतन सिंह को अपनी दोस्ती बढ़ा दी, सिर्फ चित्तोर को जीतने के लिए। बाद में, उन्होंने चित्तोर किला और राणी को जीत लिया।

वह एक bisexual थे

ऐतिहासिक प्रमाण साबित करते हैं कि वह एक बाई सेक्सुअल थे यानी की उनको पुरुष और स्त्रियों दोनों में इंटरेस्ट था . उनका मलिक काफुर के साथ भी रिश्ता था जिन्हें वे एक गुलाम बाजार में मिले थे।

 उनके घर में उनकी यौन इच्छाओं को पूरा करने के लिए पुरुष, महिलाये और बच्चे थे

उनके जैनाना में 70,000 से अधिक पुरुष, महिलाये और बचे थे उनकी यौन इछाओ को पूरा करने के लिए.

जौहर

रानी पद्मावती और अन्य महिलाओं को अलाउदीन का दास होना मंजूर नहीं था. अलाउद्दीन की नौकर बनने से अच्छा उन्हें जौहर लगा. कहा जाता है की कई सालो तक अलाउद्दीन को उन औरतो की चीखो ने चैन से जीने नहीं दिया
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